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कानपुर के किसानों को विकसित करेगी विकल्प फार्म-पद्मश्री सुभाष पालेकर द्वारा किया जायेगा लोकार्पण 20 farmer

कानपुर के किसानों को विकसित करेगी विकल्प फार्म-पद्मश्री सुभाष पालेकर द्वारा किया जायेगा लोकार्पण

कानपुर (Kanpur)- क्या गाय-बैल खेती के लिए बोझ बन गए है? क्या गौ माता की रक्षा सिर्फ नारों से हो सकती है? क्या किसान (farmer) के पास डीज़ल फुक्ने वाले ट्रेक्टर को इस्तेमाल के अलावा कोई चारा नहीं है? अगर नहीं तो देश की विकल्प टीम इन बातों से सहमत नहीं है.

पेश है विकल्प टीम के कार्यों और पहल पर हमारी यह ख़ास रिपोर्ट…

जिसमे गाय-बैलों के महत्व को बताते हुए किसानो की आय को गुना प्रस्ताव को बढ़ाने का काम किया जा रहा है. इस सहरिणीय कार्य की शुरुआत का लोकार्पण करने महाराष्ट्र के रहने वाले पद्मश्री पदक प्राप्त सुभाष पालेकर (Subhash Palekar) खुद कानपुर आएंगे। अब इसकी विकल्प फार्म कानपुर के रामदेवी के सनिगवा के ग्राम बघारा में शुरुआत होने जा रही है, जिसका लोकार्पण करने खुद सुभाष पालेकर कानपुर आ रहे है और 6 नवम्बर को कानपुर धरती के किसानों को ऐसा विकसित कर जायेंगे कि उनकी आय ज़ीरो से बढ़कर तीन गुना हो जाएगी।

किस तरह तीन गुना होती है किसानों की आय…

आज मानव समाज जहां खड़ा है वहां ऋतू-असंतुलन, प्रदूषण, संसाधनों का आभाव तथा प्राकतिक आपदाएं साफ-साफ देखी जा सकती है| पानी, ज़मीं और भोजन में ज़हर बढ़ रहा है| उर्वरकता कम हो रही है. पानी की कमी का संकट बढ़ रहा है| ग्लोबल वार्मिंग की बड़ी आशंका जताई जा रही है | कृषि के अलाभकारी हो जाने के कारण ग्रामीण आबादी का शहरों की और पलायन बढ़ता जा रहा है| जिस वजह से शहरों की व्यवस्था चरमरा रही है जिसका असर सकरार पर भी दबाव के रूप में पड़ रहा है | कुछ इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण भारत की प्रमुख समस्या का अध्यन करने तथा उनका समाधान खोजने का प्रयास ही विकल्प फार्म का विकसित होना है|

खेती की बढ़ती लागत…

आधुनिक खेती में बढ़ती रसायनों तथा किट नाशकों का प्रयोग, डीज़ल से चलने वाले यंत्रो तथा इनके आयात पर होने वाला भारीभरकम खर्च और उत्पन्न होने वाली महंगाई इन सभी समस्याओं से बचा जा सकता है| यदि खेती में पशु/मानव/सौर्यउर्जा का प्रयोग करें हमारे देश में औसत जोट की सिमा दो एकड़ से अत: हमें अमेरिकन खेती ( जिसमें डीज़ल से चलने वाले भरी भरकम यंत्रो का प्रयोग किया जाता है) की आवश्यकता नहीं है| इस विषय पर प्रयास करके सौर शक्ति/ पशु शक्ति/मानव शक्ति द्वारा चलित यंत्रो का निर्माण देखने योग्य होगा।

  1. विकल्प बैल चालित ट्रैक्टर – यह एक विशेष प्रकार का ट्रैक्टर है यह मोटर साइकल से जोड़ कर बैलों द्वारा चलाया जाता है| यह एक दिन में लगभग दो एकड़ की जुताई करने में सक्षम है|
  2. विकल्प डीज़ल- बिजाई के लिए बहुत ही आसान हस्त चालित यन्त्र बनाया गया है| जो तीन कतारों का है| इस यन्त्र से अकेला आदमी तीन से चार घंटे में एक एकड़ बिजाई कर सकता है| जिसके द्वारा गेंहू, चना, मक्का आदि बोया जा सकता है| इस यंत्र से बोने पर 80% की बचत की जा सकती है| तथा निश्चित दुरी होने के कारण किलो में आशा तीत होती है साथ ही उपज की बात करें तो 50 से 100% की बढ़त प्राप्त की जा सकती है|
  3. विकल्प ई वीडर – चूंकि फसल कतारों में लगी होती है इसी लिए खेतो में मोटर चालित कारगर निराई यंत्र उपयोग में लेते है| जिनको चलाने से निराई गुणाई आसान हो जाती है खर-पतवार नाशक दवाई नहीं डालनी पड़ती है | व् पौधों की जड़ों तक हवा का संचार होता रहता है ऐसा करने से पौधों में अनेको किल्ले फूटते है व् उसके स्वास्थ व् उत्पादिकता में खास सुधर किया जा सकता है इस वीडर से अकेला आदमी एक एकड़ की निराई गुणाई कर सकता है|
  4. जीवन-मृत – देशी शाही वॉल गाय के पालन और संवर्धन पे भी काफी वर्षो से प्रयास किया जा रहा है इस कर्म में गोबर और गौ-मूत्र से जीवामृत का उपयोग करते है जिसके बाद रासायनिक खाद डालने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती इसके अलावा देशी पद्धतियों से कीड़ा भी फसलों में नाम मात्र ही लगता है| जिसका विस्तारण नीमास्त्र और खट्टे मठ्ठे से किया जा सकता है. इस तरह से खेत पर पूर्ण रूप से प्राकतिक खेती की जा सकती है.
  5. विकल्प और पंप – एक अद्भुद सोलर पंप का निर्माण किया गया है जिससे 25 हजार से 30 हजार लीटर पानी निकाला जा सकता है जो मार्किट में उपलब्ध सभी पम्पों से दो से ढाई गुना अधिक पानी देता है चूँकि इसमें मोटर भी बोर में नहीं जाती इसलिए उसी मोटर को अलग-अलग कार्यो में लिया जा सकता है| इस पम्प को बैलों से भी चलाया जा सकता है|
  6. विकल्प साईथ – इसके इस्तेमाल से एक साधारण किसान की कार्य क्षमता बढ़ाई जा सकती है| और इसके द्वारा धान, गेंहू जौ चना मुंग उरद आदि सभी फसल कटी जा सकती है| ये यंत्र किसान लिए बहुत उपयोगी साबित होगा एवं कई राज्यों में उपयोग भी किया जा रहा है| यह यंत्र पराली जलाने की समस्या का बेहतरीन निदान करता है कटाई में किसान को अपनी फसल का 10 से 12% का हिस्सा लागत के तौर पर देना पड़ता है जिसे पूरी तरह से बचाया जा सकता है|
  7. विकल्प और ऊर्जा चालित व् प्रेशर व् धनकुट्टी- सिचाई में सोलर पम्प के प्रयोग करने के उपरांत उसी सोलर पैनल और मोटर से थ्रेशर छोटी आंटा चक्की चलाई जाती है जिसकी वजह से फसक की मढ़ई और प्रसंस्करण भी बिना लागत और प्रदूषण के अपने खेत पर ही कर लिया जाता है मढ़ई में भी किसानो का अपनी फसल का 10 से 12% का हिस्सा देना पड़ता है जिसे पूरी तरह से बचाया जा सकता है|

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