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कोरोना का कहर: 500 की मछली बिक रही 50 रुपये किलो

प्रयागराज(Prayagraj):  कोरोना महामारी और लॉक डाउन के बीच मत्स्य आखेटक और उसके व्यवसाय से जुड़े परिवार भुखमरी के कगार पर आ पहुंचे हैं. क्षेत्र के बादपुर, मेहवा कलां, डेंगुरपुर, उमापुर, नरवर चौकठा, ओनौर, जेरा, बिझौली, टेला, किहुनी, परवा, भभौरा, मदरा, दशरथपुर, बारा, छतवा, पकरी, बढौली, तनरिया, रैपुरा, चंदापुर, आदि गांव गंगा नदी के किनारे बसे हुए हैं. इन गांवों में रहने वाले हजारों मछुआरा परिवारों का मुख्यकार्य मत्स्य आखेटक करना लॉक डाउन की भेंट चढ़ चुका है.

व्यवसाय से जुड़े लोगों ने बताया की बरसात और ठंढ के दिनों में मत्स्य आखेटक से जुड़े मछुआरों को नमक तेल का खर्च निकालना भी भारी पड़ता है. गर्मी के तीन महीने गंगा नदी में मछली अधिक मात्रा में पाई जाती है. जिसके चलते प्रत्येक मछुआरा प्रतिदिन लगभग एक हजार रुपये की मछली पकड़ लेता है.

इसी समय मछुआरा पूरे वर्ष के लिए विवाह-शादी व छोटे-बड़े काम और बिगड़े दिन के लिए धन इकट्ठा कर लेता है. वहीं क्षेत्र में पकड़ी गई मछली जौनपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, रुद्रपुर और बिहार स्थित मुजफ्फरपुर के बड़ी मंडी तक भेजी जाती है. लेकिन लॉक डाउन के चलते सभी मंडी के व्यवसाई माल खरीदने से मना कर चुके है. जिसके चलते टेंगरा प्रजाति की मछली जो सामान्य दिनों में 500 रुपये प्रति किलो बिकती थी उसे 50 रुपये में खरीदार नही ले रहे हैं. इसी तरह सूती मछली 400 रुपये की जगह 30 में, गेगार 200 से 40 में, बैकरी 200 से 30 में बीक रहे हैं.

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