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Jahid Khan

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लेखक जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक है.
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बासठ साल में पहली बार बंद हुआ म.प्र.का माधव नेशनल पार्क

Jahid Khan
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प्लाज्मा थेरेपी ने जगाई उम्मीद

Jahid Khan
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पालघर में भीड़ का पागलपन

Jahid Khan
महाराष्ट्र के पालघर में बच्चा चोरी की अफवाह और उसके संदेह में, उन्मादी भीड़ द्वारा बर्बरतापूर्ण तरीके से दो साधुओं और उनके ड्राइवर की पीट-पीटकर की गई हत्या की जितनी निंदा की जाए, वह कम है। वायरल वीडियो में भीड़ इन लोगों को पुलिस वैन से बाहर घसीटकर, डंडो-पत्थरों से पीट रही है। वीडियो में यह भी दिखाई दे रहा है कि घटनास्थल पर मौजूद कुछ पुलिसवाले, हमलावरों से उन्हें बचाने के बजाय खुद बचते नजर आ रहे हैं। जाहिर है कि यह चौंका देने वाला वाकया है, जो किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक हिला दे। क्या आदमी नफरत और गुस्से की आग में इतना वहशी भी हो सकता है कि पीट-पीटकर किसी की हत्या कर दे ? क्या हमारे समाज में जंगल का कानून लागू है ? जो इंसान को न तो अब पुलिस की जरूरत है और न ही किसी कानून की ? समाज में कोई भी अपराध घटता है, तो अपराधी को पकड़ने के लिए पुलिस है और उसे सजा दिलाने के लिए कानून। कैसा भी अपराध हो ?, लोग अपने हाथ में कानून नहीं ले सकते। यदि लोग खुद ही इंसाफ करने लगेंगे, तो पुलिस और कानून की क्या भूमिका होगी ? पालघर की इस बर्बर घटना ने एक बार फिर हमारे सभ्य समाज होने के दावे पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। क्या हम सभ्य समाज से वहशी समाज में तब्दील होते जा रहे हैं ? पूरा वाकया 16 अप्रैल का है। कांदिवली मुंबई से दो साधु और उनका ड्राईवर अपनी गाड़ी से गुजरात के सूरत जा रहे थे। पालघर जिले के गडचिंचले गांव में इन लोगों को ग्रामीणों ने अचानक रोक लिया। ये कुछ समझ पाते, इससे पहले भीड़ ने इन पर हमला शुरू कर दिया। हमले की खबर सुन पुलिस मौका-ए-वारदात पर पहुंच तो गई, लेकिन इन लोगों को बचाने में नाकामयाब रही। पुलिस के सामने ही इनकी पीट-पीटकर जान ले ली गई। बहरहाल इस वारदात पर संजीदगी से कार्यवाही करते हुए, महाराष्ट्र पुलिस ने पांच सौ से ज्यादा लोगों पर मामला दर्ज कर 110 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जिसमें 9 मुल्जिम नाबालिग हैं। यही नहीं अपने कर्त्तव्य का सही तरह से निर्वहन न करने पर, दो पुलिसकर्मियों को निलंबित भी कर दिया गया है। सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आश्वासन दिया है कि कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। बावजूद इसके सोशल मीडिया पर जिस तरह से इस घटना को साम्प्रदायिक रंग दिया गया, उसे सही नहीं ठहराया जा सकता। घटना के बाद से ही कुछ खबरिया चैनलों ने अपने चैनल पर खबर इस तरह से दिखाई, मानो यह साम्प्रदायिक विद्वेष की घटना हो। सोशल मीडिया पर भी कई फर्जी वीडियो ने हमलावरों को दूसरे मजहब का बतलाया। जब बात ज्यादा बढ़ गई, तो खुद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को मीडिया के सामने आना पड़ा और उन्होंने बतलाया इस पूरी घटना में कुछ भी सांप्रदायिक नहीं है। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने साफ किया कि पालघर की घटना में जो लोग मारे गए व जिन्होंने हमला किया, वह अलग-अलग धर्मों के नहीं थे। यही नहीं बाद में महाराष्ट्र सरकार ने गिरफ्तार लोगों की वह लिस्ट भी जारी कि जिसमें एक भी शख्स दूसरे धर्म का नहीं था। उन्मादी भीड़ द्वारा देश में किसी की पीट-पीटकर हत्या करने की ये कोई पहली घटना नहीं हैं, बल्कि इस तरह की घटनाएं अब आम बात हो गई हैं। कभी औरतों को डायन बता कर, तो कभी किसी को बच्चा चोरी के झूठे इल्जाम में पकड़ पीट-पीटकर मार दिया जाता है। कथित तौर पर बीफ खाने और गाय की तस्करी के इल्जाम में तो कई बेगुनाह लोग उन्मादी भीड़ के शिकार हुए हैं। कुछ अरसे पहले की ही बात है, जब पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर में तीन मुस्लिम लोगों को भीड़ ने महज इसलिए मार दिया कि उन्हें लगा कि ये लोग पशु चोर हैं। यही नहीं राजस्थान के अलवर में गाय की तस्करी के इल्जाम में मार दिए गए पहलू खान और उत्तर प्रदेश के दादरी में बीफ खाने के इल्जाम में मार दिए गए मोहम्मद अखलाक का मामला भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था। फिर उस घटना को भला कौन भूल सकता है, जब गुजरात के गिर सोमनाथ में कुछ दलित नौजवानों को इसलिए गाड़ी से बांधकर पीटा गया, कि वो चमड़े का काम करते थे। भीड़ ने पहले उन्हें गाय को मारने वाला बताया और फिर उनकी बर्बरता से पिटाई की। पालघर में किसने बच्चे चोरी होने की अफवाह फैलायी और किसने बेगुनाहों के खून से होली खेली ?, यह जांच का विषय है। महाराष्ट्र सरकार इस पूरे मामले की निष्पक्ष ढंग से जांच कराए और जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। कार्यवाही उन लोगों पर भी होना जरूरी है, जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया पर इस घटना को साम्प्रदायिक रंग दे रहे थे। फेक वीडियो और अफवाहों से समाज का बंटवारा कर रहे थे। भड़काऊ संदेश और वीडियो प्रचारित करने वालों के खिलाफ सरकार 153 ए या अन्य धाराओं में तुरंत केस दर्ज करे और उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाए। जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस जैसी महामारी से युद्ध स्तर पर निपटने में लगी हुई है, तो हमारे देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अभी भी हर घटना को साम्प्रदायिक चश्मे से देख रहे हैं। फेक वीडियो, झूठी खबरों और अफवाहों से लगातार दूसरे समुदाय के खिलाफ घृणा और नफरत का माहौल बना रहे हैं। जब भी इस तरह के फेक वीडियो की सत्यता सामने आती है, तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया माफी की रस्मअदायगी और सरकार, यह कहकर खामोश बैठ जाती है कि वह ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करेगी।...
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