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क्या सच में काले गेहूं से होता है कैंसर और डायबिटीज का इलाज?

शुगर के मरीजों पर भी काले गेहूं का सकारात्मक परिणाम मिला है. एंटी ऑक्सीडेंट की अधिकता के कारण साधारण गेहूं के मुकाबले बहुत अधिक पौष्टिक होता है.

दरभंगा(DARBHANGA): बिहार में गेहूं के एक खास प्रजाति की खेती शुरु कर दी गयी है. अब राज्य के दरभंगा जिले में परंपरागत खेती से हट कर किसान काले गेहूं की खेती कर रहे हैं. काले गेहूं की खेती करने का मुनाफे के साथ-साथ एक और खास वजह भी है. वो है कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का निपटारा.

दरअसल, तनाव, मोटापा जैसी गंभीर बीमारियों को दूर रखने वाला और एंटी आक्सिडेंट से भरपूर है काला गेहूं. गेहूं की इस प्रजाति का विकास नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, मोहाली में हुआ है. गेहूं का काला रंग इसमें उच्च मात्रा में पाये जाने वाले एंथोसाइनिन की वजह से है. इसमें जिंक और आयरन की अधिक मात्रा भी पायी जाती है.

कैंसर, शुगर, मोटापा, तनाव के मरीजों को फायदा
शोध में पता चला है कि तनावग्रस्त व्यक्ति को काले गेहूं के आटे की रोटी खिलाने पर उसे फायदा होता है. मोटापा कंट्रोल करने में भी बहुत ही उत्साहजनक परिणाम मिलते हैं. कैंसर और शुगर के मरीजों पर भी काले गेहूं का सकारात्मक परिणाम मिला है. एंटी ऑक्सीडेंट की अधिकता के कारण साधारण गेहूं के मुकाबले बहुत अधिक पौष्टिक होता है.

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