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कैसे बनता है साबूदाना, जानकर चकरा जाएंगे आप!

साबू दाने की खीर, खिचड़ी और दलिया सभी को खासा पसंद हैं, इसे व्रत में भी लोग बहुत ही शौक से खाते हैं. लेकिन, क्या आपको पता है कि ये कैसे बनता है. अगर नहीं तो लीजिए, जान लीजिए कैसे बनता है साबू दाना.

नई दिल्ली (New Delhi) साबू दाने का जिक्र आते ही, कई सवाल जेहन में आते हैं जिसमें सबसे पहले ये बात जेहन में आती है कि आखिर ये बनता कैसे हैं? कुछ लोगों का कहना है कि ये दाने के रूप में ही पेड़ पर लगता है जबकि कुछ का कहना है कि ये एक मक्का जैसे पौधे पर लगता है. जबकि साबू दाने के साथ ये दोनों ही बाते मिथक हैं.

साबू दाने का इतिहास

असल में साबू दाना कैसे बनता है इससे पहले इसका भारत में प्रचलन और इतिहास समझना जरूरी है. भारत में 1943-1944 में दक्षिण अमेरिका से आया. और सबसे पहले सेलम में इसे उगाया गया. जिसके बाद सेलम के मणीयम छित्तीयार और केरल के पोपट लाल साग ने मिलकर इसकी पहली फ्रेक्ट्री लगाई. जिसके बाद साबू दाना पूरी दुनिया में मशहूर हो गया।

कैसे बनता है साबू दाना

असल में साबू दाना टेपिया की सागो की जड़ को अलग किया जाता है. सागो की जड़ों को टेपिया पौधे से अलग किया जाता है. ये प्रोसेस ठीक आलू को उसके पौधे की जड़ से अलग करने की तरह है. जिसके बाद जड़ को अलग कर साफ सुथरा कर इसे छोटे छोटे हिस्सों में काटा जाता है. और ग्राइंड किया जाता है.

ग्राइड करने के बाद सागो में पानी मिलाकर इससे स्टार्च और फाइबर अलग किया जाता है. इसे कई बार फिल्टर किया जाता है जिसके बाद साबू दाने के सबसे अच्छी फिल्टर स्टार्च को सुखाया जाता है. और इस सारे प्रोसेस को मशीनों के द्वारा किया जाता है. साबू दाने के सुखने के बाद ये गोलियों की फोर्म में आ जाता है. जिसके बाद इसे पैक कर घरों तक पहुंचाया जाता है.

तो देखा आपने ऐसे बनता है आपके घर में आने वाला साबू दाना जो स्टार्ट यानी कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत तो होता ही है साथ ही ये शरीर को भी ठंडक देने वाला माना जाता है.

तो अगली बार जब आप साबू दाना खरीदें तो एक बार साबू दाने को ध्यान से देखे और सोचे कि कितनी लंबी यात्रा पूरी करकर ये साबू दाना आपके हाथों में पहुंचा है.

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