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मेरी मां के पीरियड्स की वजह से मेरा जन्म हुआ, तो यह अपवित्र कैसे?

New Delhi: एक बार फिर महिलाओं में होने वाला मासिक धर्म ( पीरियड्स ) चर्चा में है। स्वामीनारायण मंदिर से जुड़े स्वामी कृष्णस्वरूप दास ने हाल ही में एक बयान दिया कि- मासिक धर्म (पीरियड्स) में पति के लिए खाना बनाने वाली महिलाएं अगले जन्म में कुतिया के रुप में जन्म लेती है और जो पुरुष इस खाने को खाते है वो बैल बनते है।

बहुत मुश्किल से हमारा पुरूषवादी समाज महिलाओं के इस भयंकर दर्द को थोड़ा बहुत समझ रहा है। लेकिन ऐसे बयान समझ को पीछे धकेलते हैं। इसे समझने में कुछ शॉर्टस् फिल्मों और डाक्यूमेंट्री ने अहम भूमिका निभाई है।

लेकिन आज भी कई मर्दों के लिए मासिक धर्म सेक्स सिम्बल है। या फिर दो ईटों के बीच ठूंसा गया एक लाल रंग का कपड़ा है। और विकसित शहरों में कूड़े में फेंका गया सेनेटरी पैड मात्र है। 21वीं शताब्दी में भी हम किस जमाने में जी रहे हैं ? हाल ही में गुजरात में कच्छ जिले के भुज कस्बे के एक कॉलेज ने प्रधानाचार्या ने कथित तौर पर 60 से ज्यादा छात्राओं को यह देखने के लिए अपने अंत:वस्त्र उतारने पर मजबूर किया कि उन्हें मासिक धर्म तो नहीं आ रही है।

मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को रसोई घर में, मंदिर में जाने की मनाही होती है। कुछ-कुछ घरों में तो उन्हें बिस्तर में सोने भी नहीं दिया जाता और उन्हें अशुद्ध माना जाता है। लेकिन मुझे एक बात आज तक नहीं समझ आई कि मेरी मां को मासिक धर्म आया जिससे मेरा जन्म हुआ तो यह अपवित्र कैसा हुआ। जो जन्म का कारण हो वह अपवित्र नहीं हो सकता।

हमें वह सारी दीवारें तोड़ देनी चाहिए जो किसी के दर्द का वजह हो। कोई भी समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब उसमें महिलाओं की बराबर की भागीदारी हो लेकिन मासिक धर्म के दौरान जिस तरह से कलंक और शर्मिंदगी का एहसास उन्हें कराया जाता है वह उन्हें असशक्त करता है।

हमारे समाज ने इस मुद्दे को इतना जटिल बना दिया है कि आज भी न लड़कियां खुलकर बात कर पाती हैं और न ही परंपरागत भारतीय समाज में आमतौर पर ऐसे विषयों पर बात करने की इजाज़त है।

एक खबर के मुताबिक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा, “माहवारी के विषय में सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से ग़लत धारणाएं, वर्जनाएं और मिथक कायम हैं और इनकी वजह से महिलाओं और लड़कियों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है।”

नैतिकता में जब हम यह कहते हैं कि सारे धर्म समान हैं तो हम उन धर्मों की अच्छाईयों को क्यों नहीं लेते जो हमारे धर्म में नहीं है। लगभरग सभी धर्मों में मासिक धर्म को अपवित्र बताया गया है लेकिन सिख धर्म महिलाओं को पीरियड्स के समय पवित्र मानता है। महिलाएं इस समय और भी ज्यादा पूजनीय हो जाती हैं।

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