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सूनसान जगहों पर पायलों की आवाज सुनकर डरिये वहां चुड़ैल भी हो सकती है…पार्ट4

अब तक आपने अपने चहेते न्यूज़ पोर्टल localheading.com पर चल रही चुड़ैल (witch) की तीनों सीरीज पढ़ी है। आज हम आपके लिए लाए हैं अपनी चुड़ैल सीरीज का चौथा भाग

कानपुर (Kanpur) – आप सोचते होंगे कि ये कोई मनगढ़ंत कहानी पर आधारित होगा या फिर मिथ्या। तो आप बिलकुल गलत हैं। क्योंकि हम अपनी हर एक सीरीज को बड़े अध्यन तमाम खोजों के बाद प्रसारित करते हैं। समय कितना भी लगे हम उन किरदारों की खोज और पूरे इन्वेस्टीगेशन के बाद ही इन्हें अपने पोर्टल में शामिल करते हैं।

इसी खोज के बाद आज हम फिर हाजिर है अपने नए किरदार के साथ जिसका चुड़ैल से हो चुका है आमना-सामना….पढ़िए हमारी इस स्पेशल रिपोर्ट में….

बुंदेलखंड के जालौन स्थित कुँआखेड़ा में रहने वाले रविकांत उर्फ खिल्लन पेशे से किसान हैं। वो अपने ट्रेक्टर से अपने तथा दूसरे के खेतों में कटाई मड़ाई का ठेका भी लेते हैं। समय की बचाव-अभाव में उन्हें रात बिरात खेतों में काम करना होता है। ऐसे ही अपने द्वारा लिए गए दूसरे किसान के खेतों की कटाई-मड़ाई के दौरान खिल्लन वहीं खेत पर ही बैठा हुआ था।

समय रात का करीब 1 से डेढ़ के बीच हो रहा था। ट्रेक्टर के साथ थ्रेशर फुल स्पीड में गेहूं की फसल काटने में लगा हुआ था। सभी लेबरें अपनी-अपनी कार्यशैलियों को अंजाम दे रहे थे। थोड़ी दूरी पर बैठा खिल्लन सब पर बराबर नजर रखे बनाये हुए था। लगातार सात साढ़े सात घंटों से खेत पर बदस्तूर काम हो-चल रहा था।

अब तक खिल्लन दो बार चिलम सुलगा चुका था और अब तीसरी बार पीने की तैयारी कर रहा था। पेट मे लीवर की शिकायत के चलते उसने दो साल पहले ही शराब पीनी छोड़ दी थी। उसने चिलम निकाली दो बीड़ियाँ भूनकर गाँजे को बारीक कर रहा था।

खिल्लन जहां बैठकर चिलम बना रहा था ठीक उसके थोड़ी सी दूरी पर एक छोटा मगर घना जंगल था। अब तक वो गाँजे को बारीक कर भुनी हुई बीड़ियाँ उसमे चूर चुका था। खिल्लन को जंगल की एक झाड़ी से कुछ हलचल सी होती दिखी।

वो ध्यान न देकर चिलम बनाने में डटा हुआ था। कुछ ही देर में हो रही हलचल कुछ और तेज हुई…….

TO BE CONTINUED…..

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पार्ट 3: सुनसान जगहों पर पायलों की आवाज सुनकर डरिये वहाँ चुड़ैल भी हो सकती है

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