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सूनसान जगहों पर पायलों की आवाज सुनकर डरिए वहाँ चुड़ैल भी हो सकती है..पार्ट 6

अब तक आपने पढ़ा कि खिल्लन के पास बीड़ी जलाने में बची आखिरी तीन तीलियाँ भी खराब हो चुकी थीं। मतलब उसके पास माचिस खत्म हो चुकी थी। परछाई को अपनी तरफ लपकता देख माचिस का वो खाली खोखा भी उसके हाथ से छूटकर गिर चुका था। अब आगे चुड़ैल (Witch)…….

वो भयानक सी दिख रही काली सी परछाई अर्धमूर्छित हो चुके खिल्लन को नजदीक से देखकर आँहें भर रही थी। खिल्लन अब तक बेसुध से होकर जमीन पर गिर चुका था। चिलम जमीन पर गिर कर बिखर चुकी थी। कल तक जो पूरे गांव में बहादुरी की शेखी बघारता घूमता था आज वो एक बला के सामने आ जाने से जमीन पर लोट रहा था।

 
खिल्लन अर्धमूर्छित अवस्था मे उस काली परछाई को अपने सीने में लोटता हुआ महसूस कर रहा था। उसकी इतनी भी हिम्मत नहीं हो पा रही थी कि वो किसी को आवाज भी मार सके। और तो और उसके गले से लेशमात्र भी आवाज निकल ही नहीं पा रही थी। खिल्लन को अपने ऊपर कुन्तलों बोझ लदा हुआ महसूस हो रहा था। उसे पता नही पर कुछ चुभ रहा था।

 
धीरे-धीरे वो चुभन बेतहासा दर्द में तब्दील होती जा रही थी। वो कराह रहा था अब उस अनजान दर्द से। बर्दास्त के बाहर हो रहे उस दर्द के बीच न जाने कहाँ से उसमे इतनी हिम्मत आ गई कि गला फाड़ कर चिल्लाया वो…..प…पंकज…बचाओ।अबकी उसकी आवाज पंकज तक पहोंच चुकी थी। नतीजतन पंकज भाग कर वहां आया जहां खिल्लन परछाई की आगोश में जमीन पर लोट रहा था।

पहले पहल तो पंकज ने जो सीन देखा उसके रोंगटे फना हो चुके थे। पर उसने हिम्मत बांधते हुए वहां मौजूद सभी को एक ललकार भरी आवाज मारी।

अरे सब भाग के इतै आबो, देखौ इतै चुड़ैल ने खिल्लन को दबोच लौ जल्दी आबौ… 

वो परछाई खिल्लन को छोड़ कर पंकज की तरफ लपकी। पंकज ट्रेक्टर की तरफ भागा। पीछे से सब पंकज की तरफ भगे। सारे लेबर अपने-अपने काम छोड़ कर पंकज व खिल्लन की तरफ भागे। परछाई बुरी तरह चिंघाड़ रही थी जैसे कोई भूखी शेरनी आज खुल गई हो। खिल्लन अभी भी ज्यों का त्यों बेसुध पड़ा हुआ था। सभी के अपने पीछे आ जाने पर पंकज फिर से पलटकर खड़ा हो गया।

उसने परछाई को ललकार कर पूछा…को है औ इतै का कर रही….

जवाब में उसे बस एक ही आवाज सुनने को मिली… हुंन्न… हूँ…..

सभी वहां मौजूद घबरा रहे थे…तब तक एक जानकार ने अपनी जेब से माचिस निकाली और दो तीन तीलियां जलाकर परछाईं की तरफ उछाली…वो तीली दर तीली पीछे हटती गई। और अंत मे गायब हो गई। पंकज खिल्लन को दो अन्य लेबरों की मदद से उठाकर ट्रेक्टर के सामने लेकर आया। अंगौछा बिछा कर उस पर पानी वगैरा डाला पर वो टस से मस नही हुआ। बस अनाप शनाप बड़बड़ाए ही जा रहा था वो। 

सुबह खिल्लन को घर लाया गया..जहाँ कई दिनो तक भीषण बुखार में तपता रहा वो। उस बात के आज दो साल बीत जाने के बाद भी खिल्लन उस रात को याद कर सिहर उठता है। 

हमने इस चुड़ैल से सम्बंधित जानकारी जुटाई जिसके तहत हमने काशी के प्रकाण्ड कर्मकाण्डी आचार्य चन्द्रशील त्रिपाठी से विधिवत जानकारी मांगी। उन्होने चुड़ैल के सम्बन्ध में जो भी जानकारी हमसे साझा कीं वो चौंकाने वाली थीं जिसका खुलासा हम अगले भाग में करेंगे। 

जानने के लिए पढ़ते रहिए…. www.localheading.com

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सूनसान जगह पर पायलों की आवाज सुनकर डरिये वहाँ चुड़ैल भी हो सकती है

सूनसान जगह पर पायलों की आवाज सुनकर डरिये वहाँ चुड़ैल भी हो सकती है….पार्ट-2

पार्ट 3: सुनसान जगहों पर पायलों की आवाज सुनकर डरिये वहाँ चुड़ैल भी हो सकती है

सूनसान जगहों पर पायलों की आवाज सुनकर डरिये वहां चुड़ैल भी हो सकती है…पार्ट4

सूनसान जगहों पर पायलों की आवाज सुनकर डरिये वहाँ चुड़ैल भी हो सकती है….पार्ट..5

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