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क्यों मना वेलेंटाइन डे!

रोम का राजा क्लाउडियस की सनक भी क्या खूब थी। वह मानता था कि बीबी-बच्चों की घर गृहस्थी मे फंसकर पुरुष समाज अपना बल पौरुष खो बैठता है, और उसी कोल्हू मे गन्ने की तरह पिरकर चीफुर रह जाता है। अत: उसने पूरे रोम साम्राज्य में नारी-पुरुष मिलन एवं प्रेम और शादी व्याह पर भी कठोर दंड की घोषणा कर दी। यह भी हो सकता है, कि राजा क्लाउडियस का निजी ऐश्वर्यमय जीवन मे भी प्रेम प्रसंग अंगूर की तरह खट्टा रहा हो। जो भी हो, इस सनकी राजा के अप्राकृतिक एवं समाज विरोधी मृत्युदंड जैसे अमानुषिक फरमानों से रोम की जनता मे तहलका मच गया। इस आग मे और घी तब पड़ गया, जब उस निरंकुश ने चोरी चुपके ब्याह रचाने वाले जोड़ों सहित उनकी शादी कराने वाले पादरियो को भी सरेआम शूली पर लटका दिया।

प्रेम मिलन और ब्याह के नाम पर वह एक तो करेला और राजहठ के कारण नीम चढ़ा था। प्रकृति, समाज और धर्मविरोधी रोम सम्राट की इस भयानक सनक ने जन-जन मे त्राहि-त्राहि मचा दी। उस मूर्ख ने यह भी नही सोचा कि मानव समाज और संस्कृति के होनहार भविष्य हमारे बच्चे ही नही जन्मेगे तो ईश्वरीय सृष्टि कैसे चलेगी? आखिर वह भी तो अपने माता पिता के प्रेम मिलन का प्रतिफल था। कौन समझाता उसे? सेनापति सामंत और सलाहकार मंत्री आदि सभी तो उसके भय से नाको चने चबा रहे थे। यूँ कि वे सब भी उसके विरुद्ध खार खाये बैठे थे।

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क्रूर शासक क्लाउडियस के प्रकृति विरुद्ध तमाम खूनी फरमानों को अनसुना व अनदेखा कर संत वेलेंटाइन ने अदम्य साहस दिखाया। और सैकड़ों जोड़ों का ब्याह रचाकर आपद्धर्म का कालजयी निर्वाह किया। इस कारण निरंकुश राजा के आदेश पर सैनिको द्वारा संत वेलेंटाइन बंदी बना लिए गए। राजा क्लाउडियस ने 14 फरवरी 269 ई० को मृत्युदंड सुनाकर संत वेलेंटाइन को शूली पर चढ़ा दिया। फिर क्या था संत वेलेंटाइन के इस बलिदान से क्षुब्ध जनता मे ऐसा अदम्य आक्रोश और राजद्रोह ज्वालामुखी बनकर भड़का कि सभी रोमन लोग सड़कों पर उतर आए। करो या मरो के उदघोषित युद्ध मे शाही सेना की जान के लाले पड़ गए। रोम सम्राट की अप्राकृतिक अधर्म नीति के शिकार सभी लड़ाकू सैनिको ने भी हथियार डाल दिए और उस क्रूर क्लाउडियस का तख्ता पलट गया। इसके बाद से हुतात्मा संत वेलेंटाइन का बलिदान ऐसा रंग लाया कि सभी रोमवासियो ने उन्हे प्रेम का देवता मान लिया। इस प्रकार संत वेलेटाइन का बलिदान दिवस वेलेंटाइन डे नाम से प्रेम, मिलन, इजहार और विवाहोत्सव के रुप मे मनाया जाने लगा।

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