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डॉ प्रियंका रेड्डी की स्मृति में पढ़ी गई रचनाएं, मौजूदा मुद्दों को कविताओं के जरिए किया गया बयां

पशु चिकित्सक थी, चार पैर वाले पशुओं को जानती थीं, पर गलती कर गई दो पैर वाले पशुओं को पहचानने में। उन्होंने कहा कि व्यंग्य व्यवस्था पर होता है, व्यवस्थापकों पर नहीं। प्रवृत्ति पर होता है व्यक्ति पर नहीं।

लखनऊ (LUCKNOW): व्यंग्यकार पंकज प्रसून ने हैदराबाद की पशु चिकित्सक डॉ प्रियंका रेड्डी की स्मृति में रचनाएं पढ़ी। तुम पशु चिकित्सक थी, चार पैर वाले पशुओं को जानती थीं, पर गलती कर गई दो पैर वाले पशुओं को पहचानने में। उन्होंने कहा कि व्यंग्य व्यवस्था पर होता है, व्यवस्थापकों पर नहीं। प्रवृत्ति पर होता है व्यक्ति पर नहीं।

दूसरे दिन कविशाला में नए कवियों साहित्यप्रेमियों ने कविता को जाना और मौजूदा मुद्दों को अपनी कविताओं के जरिए बयां किया। उत्साह, प्रेम और दुश्वारियों को साझा किया। संवाद का यह कार्यक्रम रविवार को शीरोज हैंगआउट में हुआ। कार्यक्रम में कवि सर्वेश अस्थाना ने खूब हंसाया साथ ही तंज भी किया। साहित्यकार ओम नीरव ने ‘आगे है भीषण अंधकार ठहरो साथी, कर लो थोड़ा मन में विचार ठहरो साथी…’ …सुनाई।

क्षितिज कुमार और अभय निर्भीक ने सामाजिक मुद्दों पर कवितापाठ कर चोट किया। क्षितिज ने ‘कहते हैं इंसान को खुद से रूबरू करवाती है कविता……’ पढ़ी। आयशा आयुब ने सुकांत तिवारी और अक्स समस्तीपुर के साथ कविताओं की प्रस्तुति दी। आयशा ने रचना ‘गम, खराबे, तीर्गी, आंख, खला आशुफ्तगी और भी कुछ हो अगर तो वो भी ला……’ पढ़कर खूब प्रशंसा पाई। सुकांत ने ‘शाम को ऐसे छत पर न आया करो…’ कविता… पढ़ी। अंत में अक्स समस्तीपुरी ने अपनी रचना पेश की।

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