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योगी सरकार करने जा रही है लैंड यूज में बदलाव

राजस्व संहिता 2006 के नियमों को अगर देखें तो लैंड यूज चेंज कराने के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र पर एसडीएम कोर्ट को 90 दिनों में अपना फैसला देना होता है।

लखनऊ (LUCKNOW): यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार लैंड यूज में बदलाव करने वाली है। जिसके बाद संभावना जताई जा रही है कि खेती की जमीन का अब किसी और काम में इस्तेमाल से जुड़े प्रावधान में बड़े बदलाव हो सकते हैं। दरअसल अभी तक जितने समय में लैंड यूज चेंज होता है, योगी सरकार उसे और सरल बनाएगी। जिससे उसमें ज्यादा समय न लगे। उसके बाद एसडीएम अब ऐसे मामलों को ज्यादा लंबे समय तक लटका नहीं सकेंगे। सरकर के इस फैसले का खेती योग्‍य और ग्राम समाज की जमीन पर बड़ा प्रभाव पड़ने के आसार हैं। क्योंकि अभी तक लैंड यूज चेंज कराने में काफी समय लगता है।

राजस्व संहिता 2006 के नियमों को अगर देखें तो लैंड यूज चेंज कराने के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र पर एसडीएम कोर्ट को 90 दिनों में अपना फैसला देना होता है। अधिकतम 90 दिनों में एसडीएम को फैसला देना होता है कि ऐसा किया जा सकेगा या नहीं। अगर 90 दिन में एसडीएम फैसला नहीं लेते हैं तो उन्‍हें इसका कारण बताना पड़ता है। अब सरकार इसी नियम में बदलाव करने जा रही है।
नया नियम लागू होने के बाद अब केवल 45 दिनों में ही एसडीएम को यह फैसला लेना होगा कि लैंड यूज चेंज करना है या नहीं। यानी पहले के मुकाबले ऐसे मामलों को आधे समय में निपटाना होगा।

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एसडीएम ऐसे मामलों को अब ज्यादा लटका नहीं सकेंगे, क्योंकि नये नियमों के तहत उनपर कार्रवाई का भी प्रावधान सरकार करने जा रही है। इसे 143 की कार्यवाही कहते रहे हैं। इसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में राजस्व विभाग के अफसरों की बैठक में कई फैसले लिये गए। लैंड यूज चेंज करने के अलावा बैठक में चकबन्दी और सरकारी जमीन पर पट्टा दिये जाने के नियमों में भी बड़े बदलाव करने पर कई फैसले हुए हैं।

सरकार अब ग्राम समाज की जमीन के एक्सचेंज के नये नियम भी बनाने वाली है। जैसे अगर किसी उद्योग के लिए तय जमीन के बीच में अगर कोई ग्राम समाज की जमीन आएगी तो सरकार उतनी जमीन उसी ग्राम सभा में कहीं और ले लेगी और वो जमीन उद्योग के लिए छोड़ देगी। इससे औद्यौगिक विकास में की एक बड़ी समस्या खत्म हो जाएगी। इसके अलावा अगर उद्योग के लिए सरकार की तरफ से तय सीलिंग से ज्यादा जमीन कोई खरीद लेता है, तो उसे भी रेग्यूलर कर दिया जाएगा। नये नियमों के तहत जमीन ट्रांसजेंडर को भी ट्रांसफर हो सकेगी। नये नियमों के बन जाने के बाद सरकारी जमीन पर पट्टा दिये जाने में सबसे पहली प्राथमिकता दिव्यांगों और महिलाओं को दी जाएगी। जानकारी के मुताबिक इन सभी फैसलों पर सहमति बन चुकी है और अब सिर्फ इसे कानूनी जामा पहनाना बाकी है।

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