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क्रिकेट में भविष्य तलाश रही इस शहर की लड़कियां, जमकर मैदान में बहा रही पसीना

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मोहम्मद शमी और शिवा जैसे पुरुष क्रिकेटर तैयार करने वाले मुरादाबाद में अब लड़कियां भी क्रिकेट (Cricket) मैदान का रुख करने लगी हैं. निजी क्रिकेट एकेडमी में तैयारी कर रही लड़कियां जहां भारतीय टीम (Indian Cricket Team) में जगह बनाना चाहती हैं. वहीं लड़कियां अपने खेल के जरिए देश का नाम रोशन करना है।

मुरादाबादः (Moradabad)। आज के दौर में लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं है. क्रिकेट के मैदान में मिताली राज से लेकर हरमनप्रीत तक अपने खेल से जहां देश का नाम रोशन कर रही हैं. वहीं छोटे से शहरों में भी लड़कियां क्रिकेटर बनने के सपने आंखों में लिए दिन-रात पसीना बहा रही हैं. मोहम्मद शमी और शिवा जैसे पुरुष क्रिकेटर तैयार करने वाले मुरादाबाद में अब लड़कियां भी मैदान का रुख कर रही हैं. निजी क्रिकेट एकेडमी में तैयारी कर रही लड़कियां जहां भारतीय टीम में जगह बनाना चाहती हैं. वहीं उनके अपने खेल के जरिए देश का नाम रोशन करना है।

क्रिकेट मैदान में प्रैक्टिस करती लड़कियां
क्रिकेट (Cricket) के लिए छोड़ दी पढ़ाई

तेज रफ्तार से अपनी तरफ आती गेंद को सीधे बल्ले से खेल रही ईशा मावी पिछले 1 साल से अभ्यास में जुटी है. भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मैच देखकर क्रिकेटर बनने के लिए प्रेरित हुई. ईशा को परिवार का पूरा समर्थन हासिल है.अभ्यास में दिक्कत ना हो इसके लिए ईशा ने अपनी नियमित पढ़ाई छोड़ दी और अब वह स्कूल के बजाय सीधे मैदान में पहुंचती है. मैदान में अभ्यास के आने वाली यह लड़कियां देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना लिए हर रोज मैदान में उतरती हैं. ईशा मावी का कहना है कि पिछले कुछ सालों से बदली तस्वीर के बाद अब लड़कियां घर से निकलकर क्रिकेट मैदान तक पहुंच रही है.

क्रिकेट (Cricket) के लिए परिवार कर रहा मदद

देहात क्षेत्र में रहने वाली और इस एकेडमी में क्रिकेट का प्रशिक्षण लेने वाली हेमा पटेल और अंकिता के पिता किसान हैं. वह हर रोज कई किलोमीटर का सफर तय कर मैदान में आती है. शुरुआत में लड़की के घर से मैदान तक जाने में पड़ोसियों का जरूर एतराज हुआ लेकिन अब गांव की दूसरी लड़कियां भी एकता के बनाए रास्ते पर चलने की तैयारी में है. ज्यादातर परिवार में भले ही आज भी लड़कों के मुकाबले लड़कियों को कम मौका मिलता हो लेकिन मैदान में लड़कियां लड़कों के भी छक्के छुड़ाने का दम रखती हैं.

कोच को लड़कियों से उम्मीद

पीयूष चावला और मोहम्मद शमी के कोच से ट्रेनिंग ले रही लड़कियों को उम्मीद है कि एक दिन उनको भी देश के लिए खेलने का मौका अवश्य मिलेगा. लड़कियों को क्रिकेट की बारीकियां सिखा रहे कोच बदरुद्दीन के मुताबिक लड़कों के मुकाबले यह लड़कियां कहीं ज्यादा अभ्यास करती हैं. कोच बदरुद्दीन का कहना है कि लड़कियां सपने को पूरा करने के लिए गंभीर नजर आती हैं. लड़कियों के खेल से प्रभावित कोच को उम्मीद है कि अगले 1 साल में इनमें से कुछ लड़कियां यूपी का प्रतिनिधित्व जरूर करेंगी.

क्रिकेट कोच बदरुद्दीन

मेहनत का कोई मुकाबला नहीं होता और जहाँ चाहा होती है वहाँ कोई राह मुश्किल नहीं होती. पुरुष क्रिकेटर में जिस तरह छोटे शहरों से निकले युवा क्रिकेटरों ने अपनी जगह बनाई है. उसी तरह महिला क्रिकेटर भी भविष्य की संभावनाओं को तलाश रही है. हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर आने वाले कल में यह लड़कियां महिला क्रिकेटर का भविष्य साबित हो.

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