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मुरादाबाद: कोरोना वायरस की वजह से गांव वालों ने बदली वर्षों पुरानी परम्परां

मुरादाबाद में कोरोना वायरस की महामारी के चलते हैं नट समाज ने पंचायत में फैसला लिया मरने के बाद दफन नहीं किया जाएगा. हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया जाएगा.

मुरादाबाद(Moradabad):  मुरादाबाद में आज लोगों की एक ऐसी पंचायत देखी गयी जिसमें समाज के लोगों ने वर्षों पुरानी व्यक्ति के मरने के बाद दफनाए जाने की परम्परा को ही दफन कर दिया. भरी पंचायत में निर्णय लिया गया कि अब समाज के किसी भी मृत व्यक्ति को दफन नहीं करके उसका अग्नि के माध्यम से अंतिम संस्कार किया जाया करेगा.

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पंचायत में शामिल समाज के सभी लोगों ने ताली बजाकर इस निर्णय का स्वागत और समर्थन किया. इससे पहले इस नट समाज में किसी के मरने के बाद शव को दफनाने की बरसों पुरानी परम्परा थी और बस्ती के पास में बने कब्रिस्तान में ही दफन किया जाता रहा है. लेकिन अब नट बिरादरी में किसी को मृत्यु के बाद कब्रिस्तान में दफन के लिए नहीं बल्कि शमशान शमशान में चिता के द्वारा अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाएगा.

मुरादाबाद के थाना छजलैट के गांव सलावा में बड़ी तादाद में नट बिरादरी के लोग अपने परिवारों के साथ रहते हैं. इस बिरादरी का मुख्य व्यवसाय शादी ब्याहों में बैंड बाजा बजाना और भिक्षा मांगना है. लेकिन लॉक डाउन ने सब कुछ ठप कर दिया.आज ग्राम प्रधान और नट समाज के अध्यक्ष की उपस्थिति में एक घण्टे से ज्यादा समय तक चली पंचायत में प्रधान के द्वारा प्रश्न रखा गया कि नट बिरादरी में वर्षों से चली आ रह शव को दफनाने की परम्परा को बदलना चाहते हैं और मृत व्यक्ति का संस्कार अब चिता में जलाकर करना चाहते हैं. जिसका पंचायत में उपस्थित समाज के सभी लोगों ने विश्वास जताते हुए ताली बजाकर समर्थन किया. प्रधान ने कहा नट समाज के लोग अपने को हिन्दू समाज से अलग न समझें जब इस समाज में देवी की पूजा की जाती हैं. सारे त्योहार हिन्दू रीति रिवाज से मनाए जाते हैं. तो मरने के बाद भी उसी रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए और दफन की पुरानी परम्परा को अब यहीं दफन किया जाता है.

गांव में बने श्मशान में ही अब नट बिरादरी के मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार हुआ करेगा. जलाए जाने की परम्परा को सही बताते हुए प्रधान ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से मरता है तो दफनाने से उसके अंदर की बीमारी जमीन के अंदर रहती है. जो लोगों को लग सकती है. लेकिन जलाए जाने के बाद सभी तरह की बीमारियां नष्ट हो जाती हैं इसलिए अब नट समाज में भी अग्नि के माध्यम से अंतिम संस्कार किया जाएगा.

रिपोर्टर: जोगेन्द्र कलयाण (सहारनपुर)

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