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मां को मुखाग्नि देते ही बेटे ने भी श्मशान घाट पर तोड़ा दम

Graveyard
बुजुर्ग महिला की मौत के बाद परिजन महिला का शव लेकर श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार करने पहुंचे थे. इसी दौरान मृतक महिला के बेटे की भी अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद श्मशान घाट पर ही मौत हो गयी. मां- बेटे की मौत के बाद परिजनों ने दोनों के शव को एक साथ मुखाग्नि दी

मुरादाबाद: (Moradabad)। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के बिलारी क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया जिसे देख हर किसी की आंखों में आंसू आ गए. दरअसल यहाँ एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद परिजन महिला का शव लेकर श्मशान घाट (Graveyard) पर अंतिम संस्कार करने पहुंचे थे. इसी दौरान मृतक महिला के बेटे की भी अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद श्मशान घाट (Graveyard) पर ही मौत हो गयी. मां- बेटे की मौत के बाद परिजनों ने दोनों के शव को एक साथ मुखाग्नि दी. परिजनों के मुताबिक मृत महिला का बेटा अपनी मां से बहुत प्यार करता था. बेटा मां की मौत का सदमा सहन नहीं कर पाया और उसने भी दम तोड़ दिया.

मां की मौत से सदमे में बेटा

बिलारी थाना क्षेत्र के अमरपुर काशी रोड पर स्थित खाता गांव में रहने वाली नब्बे वर्षीय बुजुर्ग महिला रामकली की बुधवार रात बीमारी के चलते मौत हो गयी थी. रामकली की मौत के बाद उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पर लाया गया. रामकली के शव को उसके इकलौते बेटे विजेंदर ने मुखाग्नि दी. शव के जलते ही अचानक विजेंदर भी उल्टियां करते हुए बेहोश हो गया. परिजनों ने अस्पताल में फोन कर एम्बुलेंस को मौके पर बुलाया लेकिन तब तक विजेंदर की मौत हो चुकी थी.

बता दें कि श्मशान घाट पर मां और बेटे के शव एक-साथ जलाए गए जिसे देख हर किसी की आंखें नम हो गयी. परिजनों के मुताबिक विजेंदर की उम्र जब सात साल की थी उस वक्त उसके पिता की मौत हो गयी थी. पिता की मौत के बाद रामकली ने ही विजेंदर को बड़ी मुश्किलों में पाला था. मां के मुश्किल दौर को विजेंदर जानते थे लिहाजा वह अपनी मां के बहुत करीब थे. बीमारी के वक्त भी विजेंदर हर रोज मां की सेवा में जुटे रहते थे. परिजन विजेंदर की असमय मौत के लिए रामकली की मौत से सदमा लगने की बात कह रहे है.

श्मशान घाट पर मां और बेटे के शव एक साथ जलने के बाद परिजन मातम में है. गांव में जहां यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है वहीं मां- बेटे के अनोखे प्यार को याद कर हर किसी की आंखें नम है. गांववालों की मानें तो बेटा अपनी मां पर जान कुर्बान करने को तैयार रहता था. बेटे ने कभी भी रामकली को किसी प्रकार की परेशानी परेशानी नहीं होने दी. दोनों का प्रेम भाव गांव में एक मिसाल बना हुआ था.

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