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ऐसे तो जल्द खत्म हो जाएगा राजस्थान के सरताज ‘गोडावण’ पक्षी का अस्तित्व

इलाके में बढ़ते आबादी के दबाव और तकनीकों के इस्तेमाल से गोडावण पक्षी की तादाद सिमटती जा रही हैं. संभावना भी जताई जा रही है कि वो दिन भी दूर नहीं जब गोडावण पक्षी आने वाली पीढ़ी प्रदेश के इस राज्य पक्षी को धरातल की बजाय किताबों में ही देख पाएगी.

राजस्थान(Rajasthan): जैसलमेर में बाडमेर के 3162 वर्ग किलोमीटर में फैले राष्ट्रीय मरू उद्यान में पिछले दो दशकों से गोडावण पक्षी के संरक्षण को लेकर मशक्कत की जा रही है, लेकिन यहां भी लगातार घट रही गोडावण की संख्या चिन्ता का विषय है. माना जा रहा है कि इलाके में बढ़ते आबादी के दबाव और तकनीकों के इस्तेमाल से गोडावण पक्षी की तादाद सिमटती जा रही हैं. संभावना भी जताई जा रही है कि वो दिन भी दूर नहीं जब गोडावण पक्षी आने वाली पीढ़ी प्रदेश के इस राज्य पक्षी को धरातल की बजाय किताबों में ही देख पाएगी. 

रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण के बेहद शर्मनाक आंकडे है. जी हां, गोडावण को बचाने के लिये सरकार द्वारा प्रतिवर्ष लाखों रुपये का खर्च कर बड़ी -बड़ी योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन इन योजनाओं के सच की हवा इतने मात्र से निकलती नजर आती है. वर्ष 1980 में गोडावण पक्षी की संख्या जहां 1250 के करीब थी वो संख्या घटकर अब 100 के आसपास रह गई है. बड़ा सवाल है पिछले सालों में गोडावण पक्षी संरक्षण के नाम पर हुए सरकार आखिर क्या कर रही है?

गौरतलब है गोडावण पक्षी प्रदेश की पहचान के रूप में जानी जाती है. राज्य पक्षी होने के चलते इसके संरक्षण एवं विकास के लिये राज्य सरकार की विशेष जिम्मेदारी भी बनती है और पिछले कई दशकों से सरकार अपनी ये जिम्मेदारी निभा भी रही है, लेकिन यह जिम्मेदारी धरातल पर कितनी और कागजों में कितनी निभर्र रही है. इसका आकलन केवल इस बात से किया जा सकता है कि कभी 1250 से भी अधिक संख्या में पाये जाने वाला गोडावन अब केवल सौ की संख्या से नीचे सिमट कर रह गयी है.

#rajasthan #jaisalmer #godavari birds #administration

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