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लाइलाज नहीं है ब्रेन ट्यूमर, ऑपरेशन से हो सकता है ठीक

बीमारियों को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं है, इसके चलते कई ऐसी भी बीमारियाँ हैं जिनके कारण लोगों की मौत हो जाती है. जबकि सही तरह से इलाज कराएँ तो उनसे बचा जा सकता है लेकिन जागरूकता नही होने के कारण कई लोग इस बीमारी से पीड़ित होकर बिना इलाज़ कराये काल के ग्रास बन जाते है.

कोटा। शनिवार 8 जून को ब्रेन ट्यूमर दिवस है, और लोगों को इसके सही इलाज के बारे जानकारी नहीं. आपको बता दें कि ब्रेन ट्यूमर का इलाज संभव है, यह लाइलाज बीमारी नहीं है. ब्रेन ट्यूमर मतलब होता है दिमाग में गांठ होना और उसके लक्षणों के आधार पर डॉक्टर द्वारा जाँचे करवाने पर इस बीमारी का पता चल जाता है. 8 जून ब्रेन ट्यूमर दिवस पर कोटा मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन डॉ एसएन गौतम ने बताया कि सिर में गांठ होने का मतलब दिमाग में कोशिकाओं की अनियंत्रित व्रद्धि होना जिसकी वजह से दिमाग के बाकि हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है और काम करना बंद कर देता है. ब्रेन ट्यूमर के बारे में दो सबसे बड़ी भ्रांतिया है, पहली की यह लाइलाज बीमारी है, जबकि इसका इलाज संभव है. 

लगभग 50 प्रतिशत ट्यूमर कैंसर के ना होकर सादे प्रकार की गांठ होते हैं जिनका इलाज पूर्ण रूप से संभव है. बचे हुए 50 प्रतिशत में भी आधे प्रथम या द्वितीय स्टेज की कैंसर होते है जिनका इलाज होने पर मरीज की उम्र 10 से 15 साल तक बढ़ जाती है. आपको बता दें कि अमेरिका में हर साल लगभग 20000 आदमी ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित होते है, वहीं भारत में लगभग 80000 लोग प्रतिवर्ष इस बीमारी से प्रभावित होते हैं. इस बिमारी का पता C.T.scan व M.R.I. जाँच  के माध्यम से किया जा सकता है.

आपको बता दें कि इसके लक्षण कई प्रकार के होते है. जैसे कि सिर में दर्द, उल्टी, नजर का कमजोर होना, चक्कर आना, कानों से कम सुनाई देना, चलने में दिक्कत आना, हाथ पैर में लकवे का असर आना, मिर्गी का दौरा आना, आवाज में बदलाव आना, याददास्त कमजोर होना आदि.
कोटा में हर प्रकार के ट्यूमर की सर्जरी मेडिकल कॉलेज में संभव हे व हर माह विभाग में 12 से 15 ट्यूमर सर्जरी की जा रही है एवं परिणाम किसी भी विश्वस्तरीय विभाग के सामान ही है तथा मरीज के कोटा से बाहर जाकर इलाज में जो खर्चा होता है उससे बचा जा सकता है.

दूसरी सबसे बड़ी भ्रांति है की ब्रेन ट्यूमर दवाइयों से ठीक हो जाता है, जबकि इसका एकमात्र इलाज सर्जरी करके ट्यूमर को निकलना है, जितनी जल्दी मरीज ऑपरेशन करवा लेता है उसको उतना ही फायदा होता है. क्योंकि ट्यूमर के बढ़ जाने से समस्याएं भी बढ़ जाती है और कई बार परिणाम आशाप्रद नहीं होता.गांठ की बायोप्सि की जाँच करवाने पर यदि कैंसर की निकलती है तो बाद में रेडियोथेरपी व कीमोथेरेपी भी दी जाती है. कई तरह के ट्यूमर के ऑपरेशन में एन्डोस्कोपी की आवश्यकता होती है जो की यहाँ उपलब्ध है एवं उपयोग में ली जा रही है. ब्रेन ट्यूमर होने के कारण अभी तय नहीं है पर रेडिएशन के संपर्क में आना, शरीर के किसी और हिस्से में हुए केंसर का ब्रेन में पहुंचना, जेनेटिक कारण आदि इसके संभावित कारण है.

रिपोर्ट– आसिफ़ खान

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