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ये क्या, मृतकों के शरीर के गहने कहां गायब हो गए?

उदयपुर। उदयपुर संभाग के प्रतापगढ़ जिले में तीन दिन पहले हुए हादसे का दर्द अभी लोग भूल भी नहीं पाए हैं और एक नई कारस्तानी सामने आने से लोगों में रोष फैल रहा है। सामने आया है कि मृतकों के पोस्टमार्टम के दौरान उनके शरीर पर मौजूद आभूषणों का कोई अता-पता नहीं चल रहा है। इस बात ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर हजार सवाल उठा दिए हैं।

आप भूले नहीं होंगे कि तीन दिन पहले प्रतापगढ़ जिले के छोटी सादड़ी में दुल्हन की बिन्दोली निकालने के दौरान एक बेकाबू ट्रक बिन्दोली पर चढ़ गया था। इस दर्दनाक हादसे में 9 की मौके पर ही मौत हो गई और 34 घायल हो गए थे। घोड़ी पर सवार दुल्हन भी घायल हुई थी जिसे उदयपुर में भर्ती कराया गया था।

इस दर्द से कुछ हल्का होने के बाद जैसे ही मृतकों के परिजनों को सुध आई तो उन्हें पता चला कि बिन्दोली में शामिल होने पर सभी के शरीर पर कोई न कोई आभूषण था। जब उन्हें शव सौंपे गए तब उन्हें एक भी जेवर नहीं मिला। जबकि, परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम से पहले जेवर मृतकों के शरीर पर थे, लेकिन बाद में नहीं मिले।

सभी मृतकों को पीएम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छोटी सादड़ी ले जाया गया था। पीएम के पहले तो सभी मृतकों के शरीर पर जेवर थे, लेकिन पीएम के बाद एक भी शव पर जेवर नहीं मिला। अब ऐसे में जेवर गए तो गए कहां? जेवरों को जमीन खा गई या आसमान निगल गया। तीन दिन तो सुध-बुध होने से इस ओर ध्यान नहीं गया, लेकिन अब यह सवाल धीरे-धीरे बड़ा हो गया है और इसके घेरे में अस्पताल के पुलिस भी आ रही है।

गाड़िया लुहार समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष कालूराम चैहान ने इस बात की जानकारी उपखंड अधिकारी प्रकाशचंद्र रैगर को दी है। चैहान ने साफ-साफ आरोप लगाया है कि शादी समारोह के दौरान सभी समाजजन सज-धज कर जाते हैं और महिलाएं खास कर शृंगार करती हैं। मृतकों के शरीर पर पीएम के पहले तो जेवर थे, लेकिन पीएम के बाद केवल शव परिजनों को सौंपे गए, जेवर क्यों नहीं?

इन सवालों के उठने के बाद अस्पताल प्रभारी सहित पुलिस अधिकारी भी सजग हो गए हैं। अस्पताल प्रभारी कह रहे हैं कि उस वक्त भीड़ ज्यादा थी, ऐसे में कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे हैं, उससे कुछ पता चल सकता है। इसी बात को पुलिस अधिकारी भी दोहरा रहे हैं और कह रहे हैं कि अस्पताल को सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश दे दिए गए हैं।

हालांकि, यह हरकत किसी ने भी की हो, ऐसी घटनाएं हर दुर्घटना में होती हैं और सवाल उठते हैं, लेकिन गमजदा परिजन इन बातों को टाल देते हैं। ऐसा संभवतः पहली बार है जब एक समाज के अध्यक्ष ने यह मुद्दा पुरजोर उठाया है। देखना यह है कि कार्रवाई होती है या फाइल दफ्तर दाखिल, लेकिन यह तो तय है कि ऐसा कृत्य करने वालों का जमीर मर चुका है।

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