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ट्रोलर्स को नेहा कक्कड़ का करारा जवाब, बोलीं- मैं नंबर हूं, इसलिए लोग मुझसे जलते हैं

Ramta
सिंगर नेहा कक्कड़ का कहना है कि मैं समझती हूं कि मैं नंबर वन हूं और लोग मेरे बारे में बात करते भी है और...
Editor's Picks

चाँद के पार जो सितारा है!

शंभूनाथ शुक्ल
जब ऋषि कपूर की फ़िल्म बॉबी आई थी, मैं तब बी.एस-सी. में पढ़ता था, उम्र 18 साल के आस-पास थी। कानपुर की न्यू बसंत टाकीज़...
हम लोग

विधि का यह कैसा विधान…!

Hemant kumar Jha
इरफान खान पारंपरिक अर्थों में स्टार नहीं थे, लेकिन समकालीन हिन्दी सिनेमा को समृद्ध करने में जिन कुछ खास कलाकारों का खास योगदान है उनमें...
Editor's Picks Uncategorized

बेढंगी और बदरंग होती ज़िन्दगी!

शंभूनाथ शुक्ल
मेरी पत्नी कहती हैं, कि ज़िंदगी कितनी बेढंगी और बदरंग होती जा रही है। पहले महिलाओं की बैठकें (किटी पार्टियाँ) होती थी, तब औरतें ख़ूब सुख-दुख बतियातीं। ख़ूब पकवान खातीं और अंत्याक्षरी होती या गाने गाये जाते। पर अब इन बैठकों में भी चार औरतें अपने-अपने मोबाइल में फेसबुक अथवा व्हाट्स एप खोल लेती हैं। बाक़ी में से कुछ फोन पर बतियाती हैं और बाक़ी इधर-उधर की बातें करने लगती हैं। कहाँ गया, वह गाना-बजाना! मेरी पत्नी को गाने-बजाने का शौक़ है, और इसी वज़ह से उनका उच्चारण साफ़ और उर्दू लफ़्ज़ों पर उनकी पकड़ है। वे ‘ज’ और ‘ज़’ तथा ‘ख’ एवं ‘ख़’ का सही उच्चारण कर लेती हैं।  बचपन में हर साल 22 मई को हम अपने गाँव चले जाते, जो कि कानपुर शहर से कुल 20 मील दूर है, और 8 जुलाई को लौट आते। 1967 में मैंने आठवां पास किया था, उम्र रही होगी 12 साल की। लौटने की एक रात पूर्व यानी सात जुलाई की रात मैंने अपने गाँव की महफ़िल में यह गाना सुनाया, तो लोग दंग रह गए-  ये रात जैसे दुल्हन बन गई है चिरागों सेकरुंगा उजाला मैं दिल के दाग़ों सेआज की रात मेरे, दिल की सलामी ले लेकल तेरी बज़्म से दीवाना चला जाएगाशम्मा रहे जाएगी परवाना चला जाएगा!तेरी महफ़िल तेरे जलवे हों मुबारक तुझकोतेरी उल्फ़त से नहीं आज भी इनकार मुझेतेरा मय-खाना सलामत रहे ऐ जान-ए-वफ़ामुस्कुराकर तू ज़रा देख ले इक बार मुझेफिर तेरे प्यार का मस्ताना चला जाएगा!मैने चाहा कि बता दूँ मैं हक़ीक़त अपनीतूने लेकिन न मेरा राज़-ए-मुहब्बत समझामेरी उलझन मेरे हालात यहाँ तक पहुंचेतेरी आँखों ने मेरे प्यार को नफ़रत समझाअब तेरी राह से बेगाना चला जाएगा!तू मेरा साथ न दे राह-ए-मुहब्बत में सनमचलते-चलते मैं किसी राह पे मुड़ जाऊंगाकहकशां चांद सितारे तेरे चूमेंगे क़दमतेरे रस्ते की मैं एक धूल हूँ उड़ जाऊंगासाथ मेरे मेरा अफ़साना चला जाएगा! 1967 में आई फिल्म ‘राम और श्याम’ का यह गाना बड़ा लोकप्रिय हुआ था। दरअसल इन फ़िल्मी गानों में भावों को व्यक्त करने के लिए स्वर के साथ-साथ चेहरे का उतार चढ़ाव उसकी एक्सरसाइज़ भी करता था, जो झुर्रियों से बचाता था। पुरानी फिल्मों का हर गाना पीड़ा, विरह, राग और विराग को दर्शाता था, गाना सुनने वाला और सुनाने वाला दोनों ही उसमें डूब जाया करते थे। 1961 में आई थी, फिल्म “हम-दोनों”। देवानंद और साधना की इस फिल्म की स्टोरी तो लाज़वाब थी ही, इसका गाना-  अभी ना जाओ छोड़कर कर दिल अभी भरा नहींअभी अभी तो आई हो, बहार बन के छाई होहवा ज़रा महक तो ले, नजर ज़रा बहक तो लेये शाम ढल तो ले ज़रा, ये दिल संभल तो ले ज़रामैं थोड़ी देर जी तो लूँ, नशे के घूँट पी तो लूँअभी तो कुछ कहा नहीं, अभी तो कुछ सुना नहींअभी ना जाओ छोड़कर कर दिल अभी भरा नहींसितारे झिलमिला उठे, चराग जगमगा उठेबस अब ना मुझ को टोकना, न बढ़ के राह रोकनाअगर मैं रुक गयी अभी, तो जा न पाऊँगी कभीयही कहोगे तुम सदा के दिल अभी नहीं भराजो ख़त्म हो किसी जगह, ये ऐसा सिलसिला नहींअभी ना जाओ छोड़कर कर दिल अभी भरा नहींअधूरी आस छोड़ के, अधूरी प्यास छोड़ केजो रोज़ यूँ ही जाओगी, तो किस तरह निभाओगीके ज़िन्दगी की राह में, जवाँ दिलों की चाह मेंकई मकाम आयेंगे, जो हम को आजमाएंगेबुरा ना मानो बात का, ये प्यार है गिला नहींयही कहोगे तुम सदा के दिल अभी भरा नहीं! हम-दोनों क्लासिक फिल्म थी। इसके बाद 1964 में आई, गंगा-जमना! दिलीप कुमार और वैजयंती माला की गज़ब फिल्म थी यह। संभवतः अवधी भाषा की पहली और आखिरी फिल्म। मज़े की बात, कि इस फिल्म में कन्हैया लाल के सिवाय सारे कलाकार पंजाबी हैं। दिलीप कुमार ने इस फिल्म की पटकथा लिखी और निर्माता भी वही थे। और वे ही नायक हैं। पंजाबी मुस्लिम परिवार से आए दिलीप के उच्चारण में कहीं कोई दोष नहीं। वे एक ठाकुर किसान बनते हैं। किसान का सीधापन, सरलता, धार्मिकता और निश्छलता अद्भुत है। फिल्म की नायिका वैजयंती माला तमिल हैं। यह सुपरहिट फिल्म थी। इसके गाने प्रेरक हैं। इसका एक गाना तो आज भी प्रेरणा देता है- इन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के।ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल के।।दुनिया के रंज सहना और कुछ न मुँह से कहनासच्चाइयों के बल पे आगे को बढ़ते रहना।रख दोगे एक दिन तुम संसार को बदल के।इन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के।अपने हों या पराए सबके लिये हो न्यायेदेखो कदम तुम्हारा हरगिज़ न डगमगाएरस्ते बड़े कठिन हैं चलना सम्भल-सम्भल केइन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के।इन्सानियत के सर पर इज़्ज़त का ताज रखनातन मन की भेंट देकर भारत की लाज रखनाजीवन नया मिलेगा अंतिम चिता में जल के,इन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के। (अब न वे गाने रहे, न गाना गाने की इच्छा-शक्ति!)...
हम लोग

जिस गली में तेरा घर न हो बालमा!

veer vinod chabra
नैनीताल में शक्ति सामंत की ‘कटी पतंग’ (1971) की शूटिंग चल रही थी। एक बहुत गंभीर गाना फिल्माया जाना था – जिस गली में तेरा...
Entertainment

इमरान हाशमी के किसिंग सीन पर क्या कहती हैं उनकी पत्नी?

Deepanshi
बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी के नाम से तो आप सभी परिचित होंगे. इमरान बॉलीवुड में रोमांटिक किसर के तौर पर फेमस हैं. इमरान को सीरियल...
Entertainment

बॉलीवुड एक्ट्रेस मौनी रॉय ने सिंगिंग की दुनिया में रखा कदम, पहला सॉन्ग हुआ रिलीज

Harish Singh
इस समय मौनी को कई बड़ी फिल्मों में काम करने का ऑफर मिल रहा है. मौनी ने अपने करियर की शुरुआत छोटे पर्दे से की...
Entertainment

Bhoot Trailer Release: विक्की कौशल की ‘भूतः द हॉन्टेड शिप’ का ट्रेलर हुआ रिलीज

Harish Singh
अभिनेता विक्की कौशल की आने वाली फिल्म ‘भूतः द हॉन्टेड शिप’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है. ट्रेलर में फिल्म की कहानी किसी हॉन्टेड...
Other States West Bengal

বলিউড ছাড়লেন জায়রা ওয়াসিম! কিন্তু কেন ?

Rohit Jha
পাঁচ বছরে একটা ব্লকবাস্টার এবং একটা উচ্চপ্রশংসিত ছবি করার পর বলিউড থেকে নিজের বিদায় ঘোষণা করলেন জাতীয় পুরস্কারজয়ী অভিনেত্রী জায়রা ওয়াসিম। আমির খানের ‘দঙ্গল’ দিয়ে...

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