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कल इरफ़ान और आज ऋषि!

Hemant kumar Jha
हिन्दी सिनेमा के इतिहास में अगर दस अभिनेताओं की सूची बनाई जाए जिन्होंने सबसे अधिक सुपर हिट फिल्में दी हैं तो उसमें ऋषि कपूर का...
हम लोग

भगवान के थप्पड़ ने ज़िंदगी बदल दी ललिता की

veer vinod chabra
ललिता पवार ने हिंदी सिनेमा में पचास से लेकर अस्सी तक के दशक में अनगिनित विभिन्न चरित्र भूमिकाएं निभाई हैं। लेकिन याद उनको सिर्फ नेगेटिव...
हम लोग

जब राज कपूर साहब सपरिवार इंदौर आए

Rajeev Saxena
मालवा को लेकर किसी मशहूर कवि ह्रदय की कलम से निकली ये पंक्तियां-  “मालव भूमि गहन गंभीरडग डग रोटी, पग पग नीर!” आज भी सच मानी जा सकती हैं। मालवा अंचल के शायद किसी भी जिले या शहर में अनाज और पानी की कभी कमी नहीं आयी।और इस इलाके को किसी शायर मिज़ाज़ शख्स ने कुछ इस तरह महसूस किया-  “सुबह ए बनारस,शाम ए अवध! शब ए मालवा!”  यानी बनारस की सुबह शानदार होती है और अवध की शाम रंगीन हुआ करती हैं। लेकिन मालवा की रातों की तो बात ही कुछ और है। मध्य प्रदेश सरकार के प्रथम श्रेणी अधिकारी पद से रिटायरमेन्ट के डेढ़ साल पहले पिताजी ने देवास के बाद मालवा में ही, अपने गृहनगर राजगढ़ में अपनी आखिरी पोस्टिंग करवा ली। बीए के बाद जब इंदौर यूनिवर्सिटी में “पत्रकारिता और जन संचार” के पाठ्यक्रम में एडमीशन की मेरी बारी आयी तो डर था कि कहीं इंकार न कर दें, पर अपेक्षा के विपरीत उन्होंने ख़ुशी ख़ुशी न सिर्फ इज़ाज़त दी बल्कि ख़ुद अपनी सरकारी गाड़ी से मुझे इंदौर तक छोड़ने आये और आज़ाद नगर में किराये का कमरा दिला कर लौट गए। उन्नीस सौ चौरासी का जुलाई महीना रहा होगा। वाकई, आज़ाद नगर की वो आजादी मैं कभी भुला नहीं पाऊँगा।  “सुबह ए बनारस” की तर्ज़ पर “सुबह  कॉलेज” और “शाम तक अख़बार” और “रात इंदौर की सड़कों, गलियों या सिनेमाहॉल में” बीतने लगीं।  दैनिक भास्कर अख़बार का कामकाज निपटाकर रात कोई साढ़े आठ बजे एम वाय अस्पताल के सामने के होटल्स से लेकर रीगल टाकीज और राजबाड़ा के पास सराफे तक के चक्कर। हीरो मैजेस्टिक मोपेड से काटते हुए इंदौर के खाने की वैरायटी खोजने और स्वाद का लुत्फ़ उठाने के मज़े, साढ़े नौ बजे किसी पत्रकार साथी को स्टारलिट टाकीज बुलाकर उसके साथ या कभी अकेले ही अंग्रेजी फ़िल्म देखकर बारह बजे तक अपने कमरे पर पहुँचने का रूटीन सा बन गया था।  भास्कर में घर के बड़े भाई की तरह स्नेह देने वाले शाहिद मिर्ज़ा जी के आने के बाद रविवारीय पृष्ठ और फिल्मों पर कॉलम लिखने के मनचाहे अतिरिक्त काम मिल गए। ये वो सुनहरे दिन थे, जब इंदौर आज की तरह व्यावसायिकता मेँ गले गले नहीं डूबा था। कई सारे बड़े क्लासिकल सिंगर्स, म्यूजिशियंस और फ़िल्म से जुड़े प्रख्यात लोग इंदौर नियमित रूप से आया करते थे। लता मंगेशकर जी की संगीत निशा मेँ उनके नाम से विशेष सम्मान की घोषणा स्व अर्जुन सिंह जी ने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उसी दौरान की थी। उन्नीस सौ पिच्यासी के अक्टूबर माह में शाहिद भाई से मालूम हुआ कि हिंदी सिनेमा के शोमैन राजकपूर साहब एक हफ्ते में इंदौर आने वाले हैं। उनके नज़दीकी फ़िल्म डिस्ट्रीब्यूटर और स्क्रिप्ट राइटर जयप्रकाश चौकसे साहब “राम तेरी गंगा मैली ” फ़िल्म का सौवां दिन फ़िल्म की पूरी टीम के साथ सेलिब्रेट करने वाले थे। शाहिद जी ने एक बार फिर मुझे बड़ी ज़िम्मेदारी दे दी। राज साहब की इस टीम को रविवारीय में कवर करने के लिए ‘भास्कर’ के सिटी पृष्ठ पर विनय लखे साहब, कीर्ति राणा जी और मांगीलाल चौहान जैसे वरिष्ठ पत्रकार इस आयोजन को कवर करने वाले थे। शाहिद भाई इसके पहले मुझे किशोर कुमार साहब के परिवार के इंदौर आने पर उनसे खास इंटरव्यूज मुझसे करवा चुके थे। मेरे लिए ये वाकई उत्साहित होने का सुनहरा मौका था। चौकसे साहब तब तक ‘भास्कर’ से फ़िल्म समीक्षक के नाते नहीं जुड़े थे। शायर राहत इंदौरी के ज़रिये मेरी उनसे मुलाक़ात हो चुकी थी। मुझे बच्चे की तरह ट्रीट करते थे। पर शाहिद भाई के कहने पर उन्होंने इंदौर से पच्चीस किलोमीटर दूर महू के “मिलिट्री गेस्ट हाउस” में रणधीर कपूर, ऋषि और राजीव कपूर जी से मेरा अपॉइंटमेंट तय करवा दिया। राज साहब को वहां किसी पत्रकार से नहीं मिलवा कर सीधे अगले दिन प्रेस क्लब में लाने का चौकसे जी का तयशुदा प्रोग्राम था। गेस्ट हाउस मेँ डायनिंग हॉल मेँ तमाम सारे मिलिट्री ऑफिसर्स के परिवार के बीच में मैंने रणधीर कपूर जी से मध्यप्रदेश के रीवा के उनके ननिहाल से लेकर मामा प्रेमनाथ जी, नरेन्द्रनाथ और कॉमेडियन राजेन्द्रनाथ जी तक और राम तेरी गंगा मैली फ़िल्म को लेकर लम्बी बातचीत टेप में रिकॉर्ड की। ऋषि कपूर जी ने अपनी पहली फ़िल्म बॉबी को लेकर पिताजी के साथ अनुभव सुनाये। राजीव कपूर ज्यादा नहीं बोले। बस इतना कि “आप लोग फ़िल्म में मेरा काम देखकर लिखिए, मैंने कैसा काम किया है!”  फ़िल्म की पूरी टीम में मन्दाकिनी किसी वजह से नहीं आ पायी थीं। पर दिव्या राणा, सईद जाफ़री साहब,  रज़ा मुराद जी सरीखे सभी कलाकारों से एक एक कर मैंने बात की। राज कपूर साहब की एक झलक के लिए आकर्षण बना रहा। वो और कृष्णा जी अपने कमरे से बाहर नहीं आये। उसी शाम इंदौर के नेहरू स्टेडियम मेँ भव्य आयोजन होना था।  अगले दिन सुबह नौ बजे कॉलेज से तड़ी मारकर प्रेस क्लब के बाहर जाकर डेरा डाल लिया। मैं मेंबर नहीं था तो अंदर जाकर बैठना संभव नहीं था। राज कपूर जैसे ही आये भीड़ लगना स्वभाविक था। सेब की तरह लाल गाल, मोटे लेकिन बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व! नज़र नहीं हट रही थी। मेँ भीड़ के बीच से उन्हें देखे जा रहा था। पीछे से अचानक एक वजनदार हाथ मेरे कंधे पर महसूस हुआ। ये रणधीर कपूर थे, राज साहब, ऋषि जी और राजीव प्रेस क्लब में भीतर चले गए। रणधीर जी बाहर पड़ी कुर्सियों पर बैठ गए। मुझे भी पास बैठा लिया। “ये पत्रकार पापाजी के बाद मुझसे सवाल करेंगे, आप बताओ क्या क्या सवाल कर सकते हैं!”  मुझे कैसे मालूम होते सवाल भला! फिर भी एक दो उन्हें बताये तब तक जयप्रकाश चौकसे जी रणधीर जी को लेने बाहर आ गए। उन्होंने मुझे भी चुपचाप अंदर ले लिया और अपने पास की चेयर पर बैठा लिया। राज साहब बोल रहे थे। मैं भी सभी के साथ चमत्कृत होकर उन्हें सुनता रहा। किशोर कुमार जी के पूरे परिवार के बाद इंदौर में राजकपूर साहब के बेटों से ये मुलाक़ात यादगार रही। बाद में टीवी शो के लिए कैमरा लेकर आर के स्टूडियो गया। और फिर रणधीर जी से मज़ेदार बातें हुईं।  मालवा के इंदौर की ये बातें ज़िन्दगी के पन्नों पर मीठी-नमकीन यादों के साथ दर्ज़ हो गईं। ...
हम लोग

जिस गली में तेरा घर न हो बालमा!

veer vinod chabra
नैनीताल में शक्ति सामंत की ‘कटी पतंग’ (1971) की शूटिंग चल रही थी। एक बहुत गंभीर गाना फिल्माया जाना था – जिस गली में तेरा...
Lucknow

LUCKNOW के युवा फिल्ममेकर की शार्ट फिल्म इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में शामिल

Raman Mishra
मॉडल हॉउस निवासी शिवार्ग ने बताया कि फेस्टिवल में दुनियाभर से आईं इंट्री में 70 फिल्में चुनी गई हैं। फिल्म की कहानी एक युवा के...
Varanasi

वाराणसी: कन्नड़ फिल्म मदगजा की शूटिंग को लेकर खड़ा हुआ विवाद

Harish Singh
फिल्मकारों ने मूवी में महाश्मशान को दिखाने के लिए धार्मिक महत्व के महानिर्वाणी घाट पर मणिकर्णिका घाट का सेट सजा दिया. जिसे लेकर अब सवाल...
Lucknow

LUCKNOW: योगी सरकार ने यूपी में बनी 22 फिल्मों को दिया 11.24 करोड़ रुपये का अनुदान

Raman Mishra
इस सूची में स्वरा भास्कर की फिल्म ‘अनारकली ऑफ आरा’ भी शामिल है। इस फिल्म को 43.31 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। लखनऊ (LUCKNOW): योगी...
Lucknow

‘छपाक’ का हुआ बेड़ा गर्क, ‘इस’ वेबसाइट ने लीक कर दी फिल्म!

Alok Verma
‘छपाक’ धीरे-धीरे सफलता की राह पर आगे बढ़ रही थी. लेकिन अब इसे लीक कर दिया गया है. जाहिर है, इससे कमाई पर असर पड़ेगा....
Lucknow

सपा अपने कार्यकर्ताओं को मुफ्त में दिखा रही फिल्म ‘छपाक’

Amit Singh Paliwal
लखनऊ – जेएनयू पहुंचना फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के लिए भारी मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। माहौल और हिन्दूवादी संगठनों की धमकी को...
Aligarh

फिल्म पानीपत में महाराजा सूरजमल को लेकर हुआ विरोध प्रदर्शन, इतिहास के साथ हुई छेड़छाड़

Khurshid Alam
सोमवार को अलीगढ़ जाट महासभा, राष्ट्रीय जाट एकता संगठन व जाट सेवादल ने कलक्ट्रेट के सामने इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किया. अलीगढ़ (Aligarh), बॉलीवुड की...

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