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एयरफोर्स में पायलट रहे, तीन जंग लड़ी.. ऐसा वैराग्य जागा कि अब हैं पायलट बाबा

प्रयागराज। प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में कुम्भ के दौरान देश-विदेश के कोने से आए साधु-संत श्रद्धालु अमृत वर्षा में पुण्य कमाते हैं। इस मेले के दौरान साधु-संतों के शाही स्नान के अलावा उनके अन्य समारोह लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है। इसी सब के बीच हर कुंभ में अजब-गजब बाबा भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खीचते हैं। ऐसे ही एक बाबा अक्सर चर्चा में रहते हैं वे हैं पायलट बाबा। इनके नाम की कहानी यह है कि संयासी बनने से पहले ये भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर रह चुके हैं।

पायलट बाबा का पुराना नाम कपिल सिंह था। इनका जन्म बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में एक राजपूत परिवार में हुआ था। बाबा ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। जिसके बाद उनका भारतीय वायु सेना में चयन हुआ। बाबा यहां विंग कमांडर के पद पर थे। सिर्फ इतना ही नहीं बाबा ने 1962, 1965 और 1971 की लड़ाइयों में भारत की ओर से अपनी सेवाएं दीं।

बताया जाता है कि साल 1996 में बाबा का मिग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बाबा बताते हैं कि उन्हें उनके गुरु हरि गिरी महाराज के दर्शन हुए और उन्हें वहां से सुरक्षित निकाला लिया गया। इसी घटना के बाबा युद्ध और हिंसा से दूर आध्यात्म की ओर बढ़ गए। करीब 16 सालों के बाद बाबा अपने परिवार वालों से मिले। बाबा ने बताया कि परिवार में किसी को भी नहीं पता था कि वह कहां चले गए और जब 16 सालों के बाद मुलाकात हुई तब कपिल सिंह पायलट बाबा बन चुके थे और परिवार वालों ने भी उनके इस रूप को स्वीकार किया। पायलट बाबा ने शादी नहीं की और अध्यात्म से जुड़ गए।

बाबा के आश्रम में विदेशी भक्तों की संख्या भी काफी ज्यादा है। बाबा का दावा है कि भारत में ही नहीं विदेशों में भी उनके भक्त हैं। बाबा के अनुसार उनके लगभग 2000 भक्त कुम्भ में हिस्सा ले रहे है। फिलहाल 250 से ज्यादा विदेशी भक्त उनके कैम्प में आ चुके हैं।

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