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कहीं आप भी तो जहरीली मछलियां नहीं खा रहे?

मछलियों की अलग- अलग डिश का जायका लेना ज्यादातर लोगों को काफी पसंद होता हैं. लेकिन कहीं आप अपने इस जायके में जहरीली मछलियां तो नहीं खा रहे हैं. जी हां ये मछलियां आपके दिमाग और लीवर दोनों को बीमार कर रही है.

कानपुर(Kanpur)- अगर आप नॉनवेज खाने के शौकिन हैं तो आपको मछलियां खाना भी काफी पसंद होगा. घर से लेकर होटलों तक लोग मछलियों की अलग- अलग डिश का जायका लेना काफी पसंद करते हैं. लेकिन कहीं आप अपने इस जायके में जहरीली मछलियां तो नहीं खा रहे हैं. जी हां ये मछलियां आपके दिमाग और लीवर दोनों को बीमार कर रही है.

दरअसल नदियों में लगातार बढ़ते औद्योगिक कचरे से मछलियां दूषित और जहरीली होती जा रही हैं. इन मछलियों के सेवन से लोगों को दिल और दिमाग की बीमारियां हो रही हैं. हाल ही में पुणे और कानपुर की मछलियों पर की गयी जांच में इन मछलियों में बड़ी मात्रा में पेस्टीसाइड के साथ लेड और मरकरी पाया गया है.

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के डीन प्रो. एमके दत्ता ने अपनी टीम के साथ मिलकर पुणे व कानपुर की नदियों में पायी जाने वाली चनना मछलियों पर डिजिटल इमेज टेक्नोलॉजी से जांच की. प्रो. दत्ता के मुताबिक डिजिटल इमेज के जरिए सामान्य मछलियों व दूषित मछलियों की आंख की पुतलियों व गिल्स में काफी अंतर पाया गया. दूषित मछलियों की आंख के रंग व पुतलियों में बदलाव पाया गया.

पुणे की मुथा मुला नदी और कानपुर की गंगा नदी में बड़ी संख्या में चनना (दूषित) पायी गयी. दरअसल इन दोनों नदियों में बड़ी मात्रा में औद्योगिक कचरा बहाया जाता है, जिसका सीधा असर यहां पायी जाने वाली मछलियों पर पड़ती है. जिससे यह मछलियां दूषित हो रही हैं.

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