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झांसी एनकाउंटर पर यूपी पुलिस शक के घेरे में, परिवार ने कहा रिश्वत न मिलने पर मारी गोली

यूपी पुलिस द्वारा कथित तौर पर झांसी के एक युवक को एनकाउंटर में मार गिराने पर सवाल उठाये जा रहे हैं. एक तरफ जहां पुलिस का कहना है कि युवक ने पहले उन पर गोली चलाई वहीं परिवारवालों ने आरोप लगाया है कि पुलिस को रिश्वत न देने पर उसे मार दिया गया.

झांसी (Jhansi), योगी सरकार की यूपी पुलिस पर लगातार उनके द्वारा किये जाने वाले कुछ एनकाउंटर पर सवाल खड़े होते रहे हैं. इस बार बुधवार को यूपी पुलिस द्वारा कथित तौर पर झांसी के एक युवक को एनकाउंटर में मार गिराने पर सवाल उठाये जा रहे हैं. एक तरफ जहां पुलिस का कहना है कि युवक ने पहले उन पर गोली चलाई वहीं परिवारवालों ने आरोप लगाया है कि पुलिस को रिश्वत न देने पर उसे मार दिया गया.

यह मुद्दा इतना गरमाया कि यूपी सियासतदानों ने उसे भुनाने में कोई मौक़ा हाथ से नहीं जाने दिया. आज अखिलेश यादव पीड़ित परिवार से मिलने उसके घर जायेंगे. उससे पहले उन्होंने ट्विट करते हुए राज्य सरकार पर निशाना भी साधा था. ऐसे में भाजपा की ओर से भी ट्विटर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव का भूमिया के साथ उनके पुराने संबंधो को बताते हुए निशाना साधा गया. दोनों के बीच नोकझोक देखने को मिली.

बहरहाल, इस घटना के बाद इलाके में पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है. पुलिस ने दावा किया है कि पुष्पेन्द्र यादव बालू खनन का कार्य बड़े पैमाने पर करता था. उसने बीते रविवार को एक पुलिस इन्स्पेक्टर पर गोली चलाई थी. जिसने कुछ दिन पहले ही उसकी ट्रक को जब्त किया था. पुलिस अधिकारी पर गोली चलाने के बाद वह मौके पर फरार हो गया. पुलिस के अनुसार जब उसको सरेंडर करने को कहा गया तो वह इंकार कर दिया और दोबारा से फायरिंग करने लगा. ऐसे में हमें मजबूरन गोली चलानी पड़ी, जिसमें उसकी मौत हो गई. 

वहीं मृतक पुष्पेन्द्र यादव के परिवारवालों ने आरोप लगाया है कि जब पुलिस इंचार्ज धर्मेन्द्र चौहान ने ट्रक जब्त किया तो बदले में ढेड़ लाख रूपये रिश्वत मांगे. पुष्पेन्द्र ने रिश्वत देने से मना किया तो उसकी हत्या कर दी गई.

मृतक की पत्नी का कहना है कि पुष्पेन्द्र ने पहले कुछ पैसे दिए भी थे लेकिन जब दरोगा ने और पैसे मांगे तो उसने इंकार कर दिया. इसलिए उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई. हमें इंसाफ चाहिए. एनकाउंटर में शामिल पुलिस वालों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाये. सूत्रों की मानें तो अभी तक एनकाउंटर करने वाले पुलिसकार्मियों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. वहीं एक बार फिर योगी सरकार को एनकाउंटर्स के मामले में विपक्ष द्वारा कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

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