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दशहरा 2019: दशहरे पर यहां नहीं होता रावण दहन, इसलिए दो गांवों के बीच होता है युद्ध

दशहरे पर यहां रावण दहन के बदले गांववालों द्वारा आपस में अरबी के पौधों से युद्ध किया जाता है. इस युद्ध की खास बात यह है कि इसमें ना तो कोई हारता है और न ही कोई जीतता है

जौनसार बावर: (Jaunsar Bawar)। नवरात्रि के समापन के बाद विजयादशमी के दिन दशहरा का पर्व मनाया जाएगा. त्रेता युग में इस दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का सर्वनाश कर राक्षस कुल का नाश किया था. बुराई पर अच्छाई की जीत के उपलक्ष्य पर इस दिन देशभर में रावण दहन और मेलों का आयोजन किया जाता है. लेकिन जौनसार में दशहरे के अवसर पर दो गांवों के बीच गागली युद्ध किया जाता है. दशहरे पर यहां रावण दहन के बदले गांववालों द्वारा आपस में अरबी के पौधों से युद्ध किया जाता है. इस युद्ध की खास बात यह है कि इसमें ना तो कोई हारता है और न ही कोई जीतता है.

दशहरे पर पाइंता पर्व

हर साल की तरह इस बार भी दशहरे के अवसर पर जौनसार बावर में रावण दहन के बजाय पाइंता पर्व मनाया जाएगा. इस पर्व पर जौनसार बावर के कुरोली और उतपाल्टा गांवों के लोगों के बीच प्रसिद्ध गागली युद्ध होगा. जिसमें दोनों गांवों के लोग एक-दूसरे पर अरबी के पत्ते और डंठलों से हमला करेंगे. जिसे लेकर दोनों गांवों के लोगों ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है. पाइंता पर्व पर दोनों गांव के लोग किसी सार्वजनिक स्थल पर एकत्रित होगें. इसके बाद ढोल-नागाड़ों की ठाप के बीच हाथों में गागली के डंठल और पत्तों को देवधार नामक स्थल पर पहुंचेंगे.

गागली युद्ध के पीछे की कहानी

लोक कथाओं के अनुसार उत्पाल्टा गांव में वर्षों पहले दो सगी बहनें रानी और मुन्नी रहती थी. दोनों बहनें घर से दूर स्थित क्याणी नामक स्थान पर कुए से पानी भरने के लिए जाया करती थी. एक दिन कुए से पानी भरते समय रानी उसमें गिर गई जिससे उसकी मौत हो गई. मुन्नी ने घर पहुंच कर रानी के कुए में गिरने की बात अपने गांववालों को बताई. लेकिन गांववालों ने मुन्नी पर ही रानी को कुएं में धक्का देने का आरोप लगा दिया. कहा जाता है कि मुन्नी अपने ऊपर लगे इन आरोपों से इतनी नाराज हो गई कि उसने भी कुएं में कूद कर अपनी जान दे दी.

मु्न्नी के कुँए में कूद कर जान देने से गांववालों को अपनी गलती का पछतावा हुआ. जिसके बाद से गांववालों ने पाइंता से दो दिन पहले मुन्नी और रानी की मूर्तियों की पूजा की जाती है. बता दें कि प्रसिद्ध पाइंता के दिन दोनों की मूर्तियों को कुएं में विसर्जित किया जाता है. मान्यता है कि मुन्नी की मौत के कलंक से बचने के लिए ही उत्पाल्टा और कुरोली गांव के लोग हर साल पाइंता पर्व पर गागली युद्ध का आयोजन कर पश्चाताप करते हैं.

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