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उधार के जूतों से संदीप भर रहा है हौसलों की उड़ान

संदीप खेल (sports) की दुनिया में उधार के जूते लेकर दौड़ के कई मुकाबलों में जीत दर्ज करा चुका हैं. सूबे के अलावा मध्य प्रदेश, बिहार में 500 मीटर, एक, दो, तीन, पांच, आठ और 10 किमी के दौड़ में प्रथम और दूसरा स्थान प्राप्त कर चुके हैं.

वाराणसी(Varanasi): एक कहावत है कि अगर आपके मन में कुछ करने की चाह हो तो कोई भी मुश्किलें आपके लिए बड़ी नहीं होती है. जिले के घोरहा गांव निवासी संदीप इसी प्रवृत्ति की बानगी हैं. संदीप वह गरीबी से जूझकर खेल की दुनिया में जगह बनाने में जुटे हैं.

संदीप के पास पहनने के लिए जूते तक नहीं है. वो उधार के जूते लेकर दौड़ के कई मुकाबलों में जीत दर्ज करा चुका हैं. सूबे के अलावा मध्य प्रदेश, बिहार में 500 मीटर, एक, दो, तीन, पांच, आठ और 10 किमी के दौड़ में प्रथम और दूसरा स्थान प्राप्त कर चुके हैं. फिलहाल संदिप 12वीं की पढ़ाई कर रहा है. जब संदिप में ज्ञानपुर में आयोजित बाबा हरिहर नजाथ क्रॉस कंट्री रेस में सफलता हासिल करने के बाद उसने कभी पिछे मुड़कर नहीं देखा.

कई प्रतियोगिताओं में सफलता के झंडे गाड़ते हुए उन्होंने अब तक सौ से अधिक प्रमाण पत्र अर्जित कर लिया है. बावजूद इसके संदीप को आगे ले जाने के लिए न तो प्रशासन ने पहल की और न ही कोई संस्था आगे आई. गरीबी से संघर्ष करते हुए मुकाम बनाने में जुटा यह धावक गरीबी से जूझ रहा है. किसी भी राज्य, मंडल स्तरीय दौड़ में जाने से पहले उसे साथियों से जूते भी उधार लेने पड़ते हैं.

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