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इस जाति में लड़के अपनी शादी का दहेज जुटाने के लिए छोड़ देते हैं पढ़ाई!

इंदौर। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने पारंपरिक सेक्स वर्कर्स समुदायों के बच्चों की शैक्षणिक स्थिति पर एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट से साफ होता है कि इन समुदायों की लड़कियों के स्कूल छोड़ने के पीछे छेड़खानी की घटनाओं का बड़ा हाथ है।

स्कूल आते-जाते समय होने वाली ऐसी घटनाओं के चलते लड़कियां पढ़ने की इच्छा होने के बावजूद स्कूल छोड़ देती हैं। यह रिपोर्ट रांची के भारतीय किसान संघ के सर्वे पर आधारित है, जो एनसीपीसीआर के कहने पर किया गया था। सर्वे में मध्य प्रदेश के बेड़िया और बांछड़ा समुदायों को शामिल किया गया है, जो विदिशा, रायसेन, रतलाम, मंदसौर और नीमच में बसते हैं।

लड़कियां छेड़खानी और लड़के शादी के चलते बीच में ही छोड़ देते हैं स्कूल

विदिशा के दुलाई, पिपलिया हाड़ी गांव और नीमच के चारौली की किशोरवय लड़कियों ने सर्वे के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो उन्हें स्कूल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा। हालांकि वे पढ़ाई जारी रखने की इच्छुक हैं।

इन लड़कियों का कहना है कि स्कूल में पढ़ने की वजह से यौनकर्मी बनने से बच जाएंगी। गौरतलब है कि यौनकर्मी समुदायों की इन किशोरियों को बचपन से ही बेहद असुरक्षित माहौल में रहना पड़ता है, जहां उनकी इज्जत हर समय खतरे में रहती है।

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